मोहनजोदड़ो की नर्तकी सिंधु घाटी सभ्यता के कलाकारों की रचनात्मकता और प्रतिभा की गवाह है, जिन्होंने कांस्य के माध्यम से नृत्य को जीवंत किया
कांस्य की नर्तकी सबसे प्रसिद्ध मूर्तियों में से एक है जो सुंदरता प्रतीक है। नर्तकी (Dancing girl ) मोहनजोदड़ो में बनी एक प्रागैतिहासिक कांस्य प्रतिमा है। मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता का हिस्सा थी। मूर्ति की खुदाई ब्रिटिश पुरातत्वविद् अर्नेस्ट मैके (Ernest Mackay) ने की थी। खुदाई के वक्त वहाँ दो मूर्तियाँ मिली। एक अब राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली में है और दूसरा कराची संग्रहालय में प्रदर्शित है।
माना जाता है कि मूर्तियां 2000 ईसा पूर्व के आसपास बनाई गई थीं। मूर्ति को लॉस्ट वैक्स तकनीक का उपयोग करके बनाया गया था। इसमें मोम से आकार बनाया जाता है और इसके ऊपर साँचा बनाया जाता है। इसके बाद मोम को पिघलाकर सांचे से निकाल दिया जाता है। अंतिम आकार देने के लिए पिघली हुई धातु को खाली कोर में भर दिया जाता है।
दिल्ली संग्रहालय में रखी मूर्ति 4.1 इंच लंबी (10.5 सेंटीमीटर) है। यह आभूषणों से सुसज्जित एक युवती या लड़की की मूर्ति है और सुंदरता का प्रतीक है। द डांसिंग गर्ल को सिंधु घाटी कला के बेहतरीन उदाहरणों में से एक माना जाता है और उस समय की सभ्यता की कला में कुशलता को दर्शाता है । मूर्ति में एक युवती को दिखाया गया है जिसके दाहिने हाथ में चूड़ियाँ भरी हुई हैं और उसके बाएँ हाथ में 4 चूड़ियाँ हैं। उसके शरीर पर और भी आभूषण हैं।
यह प्रतिमा अपनी गतिशील मुद्रा से नृत्य के सार को दर्शाती है। कहा जाता है कि यह सुंदरता और नृत्य के साथ आने वाले आनंद और मुक्ति को दर्शाता है। डांसिंग गर्ल की मुद्रा और अभिव्यक्ति मानव शरीर के द्वारा जीवन के उत्सव को मानती हुई प्रतीत होती है।
कांस्य नर्तकी सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर प्रकाश डालती है । ऐसा माना जाता है कि प्रतिमा को जननी के प्रतीक के रूप में बनाया गया था, क्योंकि नृत्य जीवन के उत्सव और फसल के मौसम से जुड़ा था। यह भी माना जाता है कि इसका उपयोग धार्मिक और सांस्कृतिक समारोहों में किया जाता था, क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता में नृत्य को पूजा का अभिव्यक्ति का एक रूप माना जाता था।
कांस्य की नर्तकी यह भी दर्शाती है की सिंधु घाटी सभ्यता काफी विकसित सभ्यता थी जहाँ धातु को सांचों में ढालकर आकार दिया जाता था।
आज भी, मूर्ति खुशी और आनंद की प्रतीक बनी हुई है। हम कैसे नृत्य के द्वारा अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं। यह जीवन के सुन्दर पलों का उत्सव है।
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